हिन्द महासागर क्या है
हिन्द महासागर 10,400 किलोमीटर लम्बे तथा 9,600 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में
विश्व का तीसरा बड़ा महासागर हिन्द महासागर पूर्वी गोलार्द्ध में स्थित है तथा यह उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलाद्ध को कवर करता है। उत्तर में इसकी सीमा एशिया के दक्षिणी भाग से लगती है। भारत में इसकी निकटता के कारण इसे हिन्द महासागर कहा जाता है। हिन्द महासागर शुरू से लेकर आज तक विश्व राजनीति और विश्व के महान देशों की विदेश-नीति का केन्द्र बिन्दु रहा है। खनिज सम्पदा का अपार भण्डार होने के कारया यह क्षेत्र अमेरिका, सोवियत संघ, चीन, जापान, फ्रांस तथा भारत के लिए प्रतिस्पर्धा का केन्द्र रहा है। हिन्द महासागर का महत्व उसके जल मार्गों और उसके क्षेत्र में उपलब्ध कच्चे माल के कारण ही है। उसके जल मार्ग पश्चिम और पूर्व के देशों के लिए जीवन रेखाएँ हैं। हिन्द महासागर क्या है
फैला हुआ है। इस विशाल जल क्षेत्र में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण द्वीप मेडागास्कर, मॉरिशस, श्रीलंका, भारत के अंडमान निकोबार द्वीप, लक्ष्यद्वीप, द्वी दमन, क्रिसमस, मालद्वीप, सिंगापुर, सोकोवा, बहरीन आदि हैं। दिनीय विश्व युद्ध से पहले इन द्वीपों तथा तटीय क्षेत्रों पर ब्रिटेन का अधिकार था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इन द्वीपों पर से ब्रिटेन का नियन्त्रण ज्यों-ज्यों ढीला होता गया, वैसे-वैसे अमेरिका, रूस तथा अन्य देशों का प्रभाव इस क्षेत्र में बढ़ता गया। व्यापारिक, आर्थिक तथा सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के कारण ही
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इस क्षेत्र में साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा छिड़ गई और यह क्षेत्र अशान्ति का अखाड़ा बन गया। व्यापारिक दृष्टि से इस क्षेत्र का महत्व बाद में समझा गया कि यूरोप, पूर्वी अफ्रीका, पश्चिमी, दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी एशिया, सुदूरपूर्व, आस्ट्रेलिया तथा ओशियाना को आपस में जोड़ने वाले जल एवं वायु मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। आर्थिक दृष्टि से इस क्षेत्र का महत्व इस बात में निहित है कि यहाँ पर खनिज तेल, रबड, डिन, मैगनीज, क्रोमियम, लोहा, निकल, टंगस्टन, हीरे, यूरिनियम, जिंक, लिथियम, बेरीलियम आदि खनिज संसाधान उपलब्ध हैं। हिन्द महासागर क्या है
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