भाषायी कौशल का मूल्यांकन
भाषायी कौशलों का मूल्यांकन निम्न है-
1. श्रवण (सुनना) कौशल का मूल्यांकन – साहित्य की विभिन्न विधाओं का शिक्षण करते समय अध्यापक संबंधित विषय-वस्तु की वर्चा छात्रों के सामने करता है। छात्रों ने विषय-वस्तु ग्रहण किया या नहीं इसके लिए पाठ का सार पूछकर विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्न पूछकर मात्रों के श्रवण कौशल की जाँच परख कर इत्यादि द्वारा श्रवण कौशल का मूल्यांकन किया जा सकता है। (भाषायी कौशलों का मूल्यांकन)
2. मौखिक (बोलना) अभिव्यक्ति कौशल का मूल्यांकन – छात्र द्वारा अपने भावों विचारों तथा अर्जित अनुभव का मौखिक रूप से अभिव्यक्त करने की योग्यता का विकास करना, भाषा शिक्षण की विभिन्न विधाओं के शिक्षण का प्रमुख उद्देश्य है।
मौखिक अभिव्यक्ति कौशल का विकास किस स्तर तक हुआ है, इसकी जाँच मौखिक परीक्षा एवं प्रायोगिक परीक्षा के द्वारा की जा सकती है। विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रमों; जैसे-भाषण, कविता, पाठ, वाद-विवाद प्रतियोगिता करवाकर उनके मौखिक अभिव्यक्ति कौशल की जाँच की जा सकती है। (भाषायी कौशलों का मूल्यांकन)
3. पठन (पढ़ना) कौशल का मूल्यांकन पठन कौशल के मूल्यांकन के अन्तर्गत विद्यार्थी की पढ़कर समझने अर्थात् अर्थ ग्रहण करने की क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है।
साथ ही विद्यार्थी द्वारा यति, गति, विराम चिहनों इत्यादि को ध्यान में रखते हुए धारा प्रवाह पढ़ने की क्षमता का मूल्यांकन भी किया जाता
है। इस कौशल का मूल्यांकन कविता-कहानी का पाठ करवाकर, गद्यांश पर आधारित प्रश्नों का हल करवाकर इत्यादि द्वारा किया जाता है। लेखन (लिखना) कौशल लेखन कौशल के मूल्याकन में अध्यापक विद्यार्थियों की लेखन क्षमता का आंकलन करता है। इसके माध् यम से वह आंकलन करता है कि विद्यार्थी लिखकर अपने विचारों को अभिव्यक्त करने में सक्षम हुआ है अथवा नहीं। साथ ही वह उसके लेखन में वर्तनी, विराम-चिहनों इत्यादि से संबंधित दोषों का भी मूल्यान करता है। निबन्ध लेखन, अनुच्छेद लेखन, सुलेख इत्यादि के द्वारा लेखन कौशल का मूल्यांकन किया जा सकता है।
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