भारत और मालदीप के संबध
मालदीव, जिसे कि मालदीव समूह और मालदीव गणराज्य, भी कहा जाता है, पर हिन्द महासागर स्थिति एक हजार से अधिक विशिष्ट द्वीपों का एक द्वीप समूह है। मालदीव भारत के दक्षिणी तट से लगभग 300 मील दूर और श्रीलंका से 450 मील दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यहाँ की अधिकांश जनसंख्या सुन्नी मुस्लिमों की हैं। मालदीव भारत का एक पड़ौसी देश है और इस नाते भारत के उससे, सांस्कृतिक, भाषायी और वाणिज्यिक संबंध भी हैं
भारत और मालदीव के बीच बहुत प्राचीन काल से संबंध रहे हैं। ये दोनों परस्पर न केवल व्यापारिक और वाणिज्यिक रूप से जुड़े हुए हैं, अपितु धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी इन दोनों देशों के संबंध रहे हैं। सन् 1965 में मालदीव की स्वतंत्रता के बाद उसे मान्यता प्रदान करने वाले तथा उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले पहले देशों में से एक भारत भी है।
तब से भारत और मालदीव ने घनिष्ट रणनीतिक, सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध स्थापित किए हैं। मालदीव ने भारत के साथ मित्रता को सहायता के स्रोत और श्रीलंका के प्रति संतुलन के रूप में देखा है, जो उसके करीब है और उसका सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। भारत ने क्षेत्रीय मुद्दों और संघर्षों को खुद से दूर रखने की मालदीव की नीति का समर्थन किया है।
1972 में, भारत ने सीडीए स्तर पर अपना मिशन स्थापित किया और 1980 में यह एक निवासी उच्चायुक्त बन गया। नवम्बर 2004 में, मालदीव ने नई दिल्ली में एक पूर्ण उच्चायोग की स्थापना की, जो उसके राजनयिक मिशनों में से एक था।
भारत और मालदीव ने 1976 में एक समुद्री संधि पर भी हस्ताक्षर किये हैं, जो दोनों देशों की समुद्री सीमाओं को परिभाषित करती है। 1981 में दोनों देशों के मध्य एक व्यापारिक समझौता भी किया गया।
वर्ष 2020 में विश्व में फैली कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने मालदीव को वित्तीय, सामग्री और रसद सहायता प्रदान की, जिससे भारत-मालदीव के संबंध और मजबूत हुए। कोविड-19 महामारी के दौरान मालदीव को भारतीय सहायता महत्वपूर्ण थी। चिकित्सा पेशेवर कोविड-19 की तैयारी में मदद के लिए मार्च में मालदीव गए थे। साथ ही मालदीव को COVID-19 महामारी के वित्तीय प्रभावों को कम करने में मदद करने के लिए भारत से +250 मिलियन की वित्तीय सहायता भी दी गई। ‘ऑपरेशन संजीवनी’ के हिस्से के रूप
में, भारतीय वायु सेना ने अप्रैल में मालदीव सरकार के अनुरोध पर मालदीव में 6.2 टन भारत और मालदीप के संबन्ध
महत्वपूर्ण दवाएँ और अस्पताल की आपूर्ति की लॉकडाउन के बाद लॉजिस्टिक कठिनाइयो के बावजूद भारत ने आवश्यक खाद्यान्न और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति भी की। इसके पूर्व वर्ष 2018 में मालदीव के राष्ट्रपति सोलिह भारत यात्रा पर आए थे। उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने भारत के प्रयानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी गए थे। फरवरी 2020 में दोनों देशों के मध्य सुरक्षा और कानून प्रवर्तन सहयोग पर चर्चा हुई थी। जुलाई 2022 में मालदीव रक्षा बलों ने प्रमुख रक्षा सहयोग पर चर्चा करने भारत आये थे। वर्तमान में मालदीव में मौजूद भारत के कुछ सैनिकों को हटाने और चीन के बहकावे में आने के कारण वहाँ के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइजू के कुछ बयानों और नीतियों के कारण भारत-मालदीव संबंधों में वर्तमान में खटास आ गई है।