भाषा की परिभाषा देते हुए उसकी विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। उत्तर भाषा विज्ञान का अर्थ एवं परिभाषा
भाषा की परिभाषा यह है कि यह मनुष्यों द्वारा अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उपयोग की जाने वाली मौखिक, लिखित या सांकेतिक संचार की एक संरचित प्रणाली है
मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज में रहने के नाते उसे आपस में सर्वदा ही विचार विनिमय करना पडता है। कभी वह शब्दों या वाक्यों द्वारा अपने आपको प्रकट करता है, तो कभी सिर हिलाकर उससे काम चला लेता है। अपने व्यापकतम रूप में तो भाषा वह साधन है, जिसके माध्यम से हम सोचते हैं, अपने विचारों को व्यक्त करते हैं। भाषा उसे कहते हैं, जो बोली और सुनी जाती है और बोलना भी पशु-पक्षियों का नहीं गूँगे मनुष्यों का भी नहीं, केवल बोल सकने वाले मनुष्यों का। भाषा को निम्नांकित रूपों में परिभाषित किया जा सकता है-
1. भाषा अपनी सम्पूर्णता में भाषा विज्ञान के अध्ययन का विषय है। इसके अन्तर्गत मानवीय वाणी के सभी सम्भव रूप आ जाते हैं। मनुष्यों के द्वारा बोली जाने वाली भाषा, दस्तावेज में सुरक्षित भाषा, ताम्रलेखों अथवा शिलालेखों के रूप में सुरक्षित भाषा-सभी का अध्ययन भाषा-विज्ञान का विषय है।
2. भाषा-बिज्ञान उस शास्र को कहते हैं, जिसमें भाषा-मात्र के भिन्न-भिन्न अंगों औरस्वरूपों का बिवेचन तथा निरूपण किया जाता है।.. सारांश यह कि भाषा-विज्ञान कीसहायता से हम किसी भाषा का वैज्ञानिक दृष्टि से बिवेचन, अध्ययन-अनुशीलन करना सीखते हैं।
डॉ. श्यामसुन्दर दा्स- “भाषा-विज्ञान
जि
3. भाषा विज्ञान भाषा की उत्पत्ति, उसकी बनावट, उसके विकास तथा उसके हास की वैज्ञनिक व्याख्या करता है।
-डॉ. श्यामसुन्दर दास- ‘भाषा-रहस्य
4. भाषा-तत्वां का अध्ययन भाषा बिज्ञान का विषय है।
– डॉ, बाबराम सक्सेना- ‘सामान्य भाषा-विज्ञान
5. भाषा विज्ञन उस विज्ञान को कहते हं, जिसमें सामान्य रूप से मानवीय भाषा का, किसी विशेष भाषा की रचना और इतिहास का और अन्ततः भाषाओं, प्रादेशिक भाषाओं या बोलियों क वर्गं की पारस्परिक समानताओं और विशेषताओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है।
-डां, मंगलदेव शास्री- तुलनात्मक भाषा शास्र अथवा भाषा विज्ञान’
6. भाषा-विज्ञान का सीधा अर्थ है भाषा का विज्ञान और विज्ञान का अर्थ है विशिष्ट जञान। इस प्रकार भाषा का विशिष्ट ज्ञान भाषा-विज्ञान कहलायेगा।
-प्रो. देवेन्द्र शर्मां- “भाषा विज्ञान की भूमिका
7, भाषा-विज्ञान बह विजान है, जिसमें भाषा विशिष्ट कई और सामान्य का समकालिक ऐतहासिक और प्रायागिक दृष्टि से अध्ययन जाता है। और तद्वषयक सिद्धांतों का निधार्रण किया है
डॉ भोलानाथ तिवारी-“भाषा-विज्ञान