19वीं और 20वीं शताब्दियों के समाचार-पत्र और पत्रिकाओं, अंग्रेजी के साथ-साथ विभिन्न देशी भाषाओं में प्रकाशित, ने आधुनिक भारतीय इतिहास के सृजन हेतु जानकारी के बेहद महत्वपूर्ण एवं प्रामाणिक स्रोत का निर्माण किया। कुछ समाचार-पत्र 1780 के दशक से भी पूर्व प्रकाशित हुए। भारत में समाचार-पत्र प्रकाशित करने का प्रथम प्रयास अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के असंतुष्ट कर्मचारियों द्वारा किया गया जो निजी व्यापार में कुरीतियों को उद्घाटित करना चाहते थे। भारत में जेम्स आगस्टस हिके ने 1780 में बंगाल गजट या कलकत्ता जनरल एडवर्टाइजर नामक पहला समाचार पत्र प्रकाशित किया। तत्पश्चात द कलकत्ता गजट (1784), द बंगाल जर्नल (1785),

द ऑरिएंटल मैग्जीन ऑफ कलकत्ता या कलकत्ता अम्यूजमेंट (1785), द कलकत्ता क्रॉनिकल (1786), द मद्रास करिअर (1788) और द बाम्बे हेराल्ड (1789) जैसे कई प्रकाशन प्रकट हुए।
महत्वपूर्ण समाचार-पत्र
प्रेस एक्ट 1835 की नरम नीति, जो 1856 तक जारी रही, ने देश में समाचार-पत्रों के विकास को प्रोत्साहित किया। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध से कई प्रभावशाली समाचार-पत्र प्रसिद्ध एवं निडर पत्रकारों के नेतृत्व में सामने आए। कुछ महत्वपूर्ण समाचार-पत्र थे जी. सुब्रमण्यम अय्यर के संपादकत्व में द हिंदू और स्वेदेशमित्रन, बालगंगाधर तिलक के नेतृत्व में केसरी और महाराट्टा, सुंदर नाथ बनर्जी के तहत बंगाली, शिशिर कुमार घोष और मोतीलाल घोष के नेतृत्व में अमृत बाजार पत्रिका, गोपाल गणेश अगरकर के तहत् सुधारक, एन.एन. सेन का इंडियन मिरर, दादाभाई नौरोजी का वॉयस ऑफ इंडिया, जी.पी. वर्मा का एडवोकेट, पंजाब में ट्रिब्यून एवं अखबार, बॉम्बे में इंदु प्रकाश, ध्यान प्रकाश, कल एवं गुजराती, बंगाल में सोम प्रकाश बंग निवासी एवं सधारनी। यह रोचक तथ्य है कि 1885 में गठित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लगभग एक-तिहाई संस्थापक पत्रकार थे।
विदेशी प्रकाशन
कुछ समाचार-पत्र एवं पत्रिकाओं का प्रकाशन विदेशी में भी हुआ। उदाहरणार्थ, श्यामजी कृष्णवर्मा ने लंदन में इंडियन सोशियोलॉजिस्ट का प्रकाशन किया। इसी प्रकार मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस से बदे मातरम् और वीरेन्द्र नाथ चट्टोपाध्याय ने बर्लिन से तलवार प्रकाशित किया। इस संदर्भ में, 20वीं शताब्दी के दूसरे दशक के दौरान सैन फ्रांसिस्को से गदर पर गदर पार्टी के मुखपत्र के तौर पर प्रकाशित किया गया, और बैंकुवर से तारकनाथ दास का हिंदुस्तान प्रकाशित हुआ। इन सभी ने विदेशों के क्रांतिकारी एवं राष्ट्रवादी गतिविधियों पर पर्याप्त प्रमाण एवं जानकारी प्रदान की।
समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएं
समाचार-पत्रों का महत्व
समाचार-पत्र जनमत का निर्माण करते हैं और उनके द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट का लोगों पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। समाचार-पत्र विभिन्न घटनाओं पर लोगों की भावनाओं एवं दृष्टिकोण को आकार प्रदान करते हैं। समाचार-पत्र आधुनिक भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत रहे हैं। इसे इस तथ्य से समझा जा सकता है कि 1870 के दशक से इन अखबारों (अंग्रेजी एवं देशी भाषाओं दोनों) ने भारतीय औपनिवेशिक से वर्तमान समय तक जीवन के लगभग सभी पहलुओं को चित्रित किया है। 1920 के दशक से अखबारों ने गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता हेतु राष्ट्रवादी संघर्ष के दौरान प्रमुख घटनाओं को सूक्ष्म तरीके से विश्लेषित एवं शामिल किया।
हालांकि, समाचार-पत्रों को निष्पक्ष तौर पर नहीं देखा गया। इन्हें ऐसे लोगों द्वारा प्रकाशित किया गया जिनके अपने राजनीतिक विचार एवं वैश्विक मत थे।
