वैदिक साहित्य का वर्गीकरण प्रस्तुत करें
चार वेद
चार वेद :- भारत के प्राचीनतम धर्मग्रंथ जिसके संकलनकर्ता कृष्णद्वैपायन (वेदव्यास) है।
ऋग्वेद :- कुल 10 मंडल, देवताओं की स्तुति मंत्र, दसवें मंडल का पुरुष सूक्त चारों वर्णों से संबंधित, पुरोहित होत
उपवेद – आयुर्वेद, प्रथम और 10वां मंडल नवीनतम तथा दूसरा और सातवा मंडल – प्राचीनतम
सामवेद :- प्राचीनतम संगीतग्रंथ, भारतीय संगीत का जनक, सूर्यस्तुति, पुरोहित उदगाता, उपवेद-गंधर्ववेद ।
यर्जुवेद :- यज्ञ व अनुष्ठानों का वर्णन, पुरोहित अर्श्वयु, उपवेद धनुर्वेद ।
अर्थववेद:- तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, वशीकरण, शल्य चिकित्सा का उल्लेख, पुरोहित ब्रह्मा, उपवेद-शिल्पवेद (भवन निर्माण) ।
उपनिषद
गुरू के समक्ष बैठकर प्राप्त किया गया ज्ञान, वेदों के अंतिम भाग इसीलिए “वेदांत कहा जाता है, कुल संख्या 108 तथा प्रमाणिक 12 हैं।
मुण्डकोपनिषद् (अथर्ववेद) से ‘सत्यमेव जयते लिया गया।
छान्दोग्य उपनिषद (सानवेद) सबसे प्राचीन उपनिषद है।
जावलोपनिषद् (यजुर्वेद) में पहली बार चारो आश्रमों का उल्लेख
आरण्य ग्रंथ
दार्शनिक बातों का वर्णन, ब्राह्मण के अंतिम भाग, वर्तमान में कुल 7 प्रमाणिक । वनों के ऋषि मुनियों हेतु रचना, अथर्ववेद का कोई आरण्य नहीं।
ब्राह्मण ग्रंथ
यज्ञ तथा अनुष्ठानों की प्रक्रियाओं को सामान्य रूप से बताने के लिए रचित । एतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद) ग्रंथ में पहली बार राज्याभिषेक नियमों का उल्लेख ।
शतपथ ब्राह्मण (यजुर्वेद) ग्रंथ :- सबसे प्रमाणिक ब्राह्मण ग्रंथ
वेदांग
इन्हें “वेदों का अंग कहा जाता है। इनकी संख्या 6 मानी गई है। शिक्षा. व्याकरण, छंद, कल्प, ज्योतिष, निरुक्त ।
वेदांग को गद्य स्वरूप में लिखा जाता है।
महाकाव्य
* 2 महाकाव्य :- रामायण और महाभारत
किसी भी महापुरुष के जीवन का सम्पूर्ण चित्रण।
महाभारत-रचना महर्षि वेद्व्यास, अन्य नाम : जयसंहिता, फारसी
अनुवाद : रज्मनाभा, कुल श्लोक 1 लाख (प्रारंभ में 8 हजार)
रामायण :- रचना वाल्मिकी, कुल श्लोक 24 हजार (प्रारंभ में 6 हजार)
नोट :- महाभारत के छठवें पर्व (भीष्म पर्व) का भाग भगवत गीता है।
पुराण
प्राचीन लोकनायकों तथा महापुरुषों से संबंधित वर्णन
इसकी रचना महर्षि लोमहर्ष तथा इनके पुत्र उग्र श्रवा के द्वारा प्रमाणित संख्या – 18
सभी पुराणों में मत्स्य पुराण सर्वाधिक प्राचीन और प्रमाणिक, मौर्य वंश विष्णु पुराण, गुप्त वंश वायु पुराण, शुंग वंश मत्स्य पुराण, आध सातवाहन – विष्णु पुराण तथा मत्स्य पुराण । वैदिक साहित्य क्या है
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